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उर्मिला मातोंडकर मातोश्रीवर दाखल

राहुल गांधी जानते हैं कि,  ट्रोलर्स उन्हें 'पप्पू' कहते हैं : मिलिंद देवरा 

मृणालिनी नानिवडेकर
शुक्रवार, 15 डिसेंबर 2017

मुंबईः सोशल मीडिया में राहुल गांधी को ' पप्पू ' कहते हुए , उन का   मखौल उडाये जाने की बात जब खुद राहुल को  पता चली, तब उन की प्रतिक्रिया कैसी थी, इस के बारे में ,  गांधी परिवार के निकटवर्ती समझे जाने वाले , काँग्रेस के पूर्व सांसद मिलिंद देवरा से जानना चाहा. 

मुंबईः सोशल मीडिया में राहुल गांधी को ' पप्पू ' कहते हुए , उन का   मखौल उडाये जाने की बात जब खुद राहुल को  पता चली, तब उन की प्रतिक्रिया कैसी थी, इस के बारे में ,  गांधी परिवार के निकटवर्ती समझे जाने वाले , काँग्रेस के पूर्व सांसद मिलिंद देवरा से जानना चाहा. 

देवरा ने बताया, " एक दिन किसी ने डरते डरते इस का ज़िक्र करने की कोशिश की. उस माजरे को भाँप कर राहुल गांधी तपाक से बोले, ' मैं जानता हूँ . मेरा मखौल उडाने के लिये ही यह सब हो रहा है. लेकिन देश की जनता यह नहीं कह रही. राजनीति करने वाले कुछ लोगों ने किराये पर रखे हुए ट्रोलर्स ही यह हरकत कर रहे हैं. हमें तो बस इतना ही याद रखना है कि , देश की जनता विकास चाहती है. " 

राहुल गांधी के बारे में मिलिंद देवरा ने आगे बताया कि, काँग्रेस के नवनिर्वाचित  अध्यक्ष राहुल गांधी हमेशा काफ़ी सोच विचार के बाद ही कोई निर्णय लेते हैं. जब हम उन्हें कम से कम दस  नये सुझाव देते हैं, तब उन में से एकाध ही उन्हें चर्चा करने योग्य मालूम होता है. सुझाव अच्छा लगने पर ही वे उसे स्वीकारतें हैं. हर काम वे बड़ी समझदारी के साथ करते हैं.

" पार्टी की बागडोर थामने की गुज़ारिश उन से अक्सर की जाती रही. लेकिन इस  के लिये सही वक्त चुनने  में भी उन्हों ने महीनों गुज़ार दिये. सही समय आ जाने का एहसास होने के बाद ही उन्हों ने नामांकन पत्र दाखिल किया, " यह भी देवरा ने स्पष्ट किया. 

देवरा ने आगे कहा , " राहुल गांधी जो भी करते हैं,  दिलोजान से  करते हैं. फिर भले ही वह दलितों के साथ संवाद स्थापित करना हो या युवाओं से बातचीत करनी  हो , या फिर इन दिनों गुजरात में चल रहा चुनाव प्रचार हो; हर इक काम में वे अपने आप को बिल्कुल झोंक देते हैं.  मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने  या खुद की  सकारात्मक प्रतिमा बनाने की मानसिकता इस के पीछे बिल्कुल  नहीं होती." 

 किसानों की कई समस्याओं को ठीक से  समझने के लिये राहुल गांधी उन प्रश्नों की तह तक जाते हैं. किसानों द्वारा आत्मघात के मामले में , संबंधित हिस्सों का दौरा करते हुए भी उन्हों ने पहले सारी जानकारी हासिल की और उस के बाद ही समस्याग्रस्त लोगों से संवाद की पहल की. गुजरात विधानसभा चुनाव के लिये वे भरसक प्रयास कर रहे हैं, यह खुलासा भी देवरा ने किया.

देवरा ने कहा, " राहुल गांधी देश की जनता की समस्याओं को ज़ुबाँ देना चाहते हैं. उन्हें सुलझाना चाहते हैं. देश का दिशानिर्देश करने की क्षमता केवल काँग्रेस के पास ही है, यह वे जनता को समझाना चाहते हैं. "

पार्टी के अध्यक्ष के पद पर राहुल गांधी का चुना जाना, महज परिवारवाद के कारण ही हुआ है और केवल गांधी परिवार के सदस्यों को ही यह पद दिया जाता है, इस बात की चर्चा होती रहती है. इस संबंध में पूछे जाने पर देवरा ने कहा, "   भाजपा में अध्यक्ष को नियुक्त किया जाता है और हमारे यहाँ वह चुना जाता है. काँग्रेस के अध्यक्ष पद के लिये, नामांकन पत्र भरने वाले केवल राहुल गांधी ही एक मात्र थे, इसीलिये वे निर्विरोध अध्यक्ष बने हैं. "

इस चुनाव में उतरने के लिये हर किसी के पास मौका था. राहुल गांधी ही अध्यक्ष बनें, यह हमारी पार्टी में हर कोई चाहता था. यही वजह है कि, किसी और ने नामांकन पत्र नहीं भरा, यह भी देवरा ने बताया. साथ ही, इस प्रश्न के उत्तर में कि, क्या राहुल गांधी काँग्रेस में प्राण फूंकने की चुनौती संभाल पायेंगे, देवरा ने कहा, 
" आगे आगे देखिए , होता है क्या !"

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