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मुख्यमंत्री चाहें तो सिन्हा के साथ चर्चा करूँगा : चंद्रकांत पाटील

सरकारनामा ब्युरो
बुधवार, 6 डिसेंबर 2017

अगर मुख्यमंत्री मुझे सिन्हा के साथ चर्चा करने की ज़िम्मेदारी सौंपते हैं, तो मैं अपना काम अवश्य ही संतोषजनक रूप से पूरा करूँगा, यह बात दावे के साथ राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कही है. मंत्रालय में आयोजित एक पत्रकार गोष्ठी में वे बोल रहे थे. चंद्रकांत पाटील ने कहा, " पत्रकारों से मेरी यह बातचीत सिन्हा अगर सुन लें, तो शायद  अपनी माँगों के बारे में उन का समाधान हो सकता है. मैं मीडिया के माध्यम से सिन्हा  से आवाहन करता हूँ कि,  किसानों के संबंध में हम सभी तरह के प्रयास कर रहे हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए आप आंदोलन वापस ले लें . "

मुंबई : अगर मुख्यमंत्री मुझे सिन्हा के साथ चर्चा करने की ज़िम्मेदारी सौंपते हैं, तो मैं अपना काम अवश्य ही संतोषजनक रूप से पूरा करूँगा, यह बात दावे के साथ राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कही है. मंत्रालय में आयोजित एक पत्रकार गोष्ठी में वे बोल रहे थे. चंद्रकांत पाटील ने कहा, " पत्रकारों से मेरी यह बातचीत सिन्हा अगर सुन लें, तो शायद  अपनी माँगों के बारे में उन का समाधान हो सकता है. मैं मीडिया के माध्यम से सिन्हा  से आवाहन करता हूँ कि,  किसानों के संबंध में हम सभी तरह के प्रयास कर रहे हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए आप आंदोलन वापस ले लें . "

कृषि ऋण माफ़ किये जाने के मुद्दे पर चंद्रकांतदादा पाटील ने कहा, " अब तक ९ लाख , ४३ हज़ार किसानों के खातों पर ऋणमुक्ती के लिये ५  हज़ार, १४१.९७ करोड रुपये जमा कर दिये गये हैं. बँकों को १७ लाख, ६८ हज़ार किसानों की सूची दी गयी है. इस के लिये बँकों को १० हज़ार, ६३२ करोड रुपये भी दिये गये हैं. आने वाले ८- १० दिनों में किसानों के,  बँकों द्वारा  जाँचे जा चुके खातों में पैसे जमा कर दिये जायेंगे. लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या ४३ तक पहुँच सकती है. ४० लाख किसानों के लिये कृषि ऋण माफ़ और नियमित रूप से कर्ज़ की अदायगी करने वाले ४० लाख किसान, इस तरह से कुल ८० लाख किसानों को ऋणमुक्ती दे दी जायेगी. "

विरोध करने वालों की ओर से जारी 'हमला बोलो आंदोलन' पर टिप्पणी करते हुए चंद्रकांत पाटील ने कहा कि, कोई प्रश्न  ऐसा नहीं मिलेगा, जब सरकार ने किसानों का साथ न दिया हो. फिर चाहे वह अकाल की समस्या हो  या  कृषि ऋणों के लिये माफ़ी या गन्ने का मामला हो, हर बार सरकार ने अपना काम पूरा किया है. विरोधकों का यह कहना कि, कपास के बारे में बड़ा भारी नुकसान झेलना पड़ा है, ऐसी बात नहीं है. कपास का उत्पादन बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है और कपास के पौधों में लगे रोग की क्षतिपूर्ती तो हम करने ही वाले हैं.

पाटील ने आगे बताया कि, अब तक दो बार खतों से रुई चुनी गयी है. पिछले वर्ष की अपेक्षा दोगुना कपास बाज़ार में पहुँच चुकी है. तीसरी बार चुनते समय पौधों में लगे रोग के कारण नुकसान झेलना पड़ रहा है. अभी दिसंबर शुरू हुआ है. अब भी कपास का उत्पादन बाज़ार में पहुँचना बाकी है. अब मंत्रिमंडल में इस बारे में निर्णय होते ही पंचनामों की प्रक्रिया भी तुरंत शुरू कर दी जायेगी. इस की शुरुआत हो चुकी है. इस की रिपोर्ट एनडीआरएफ को भेजनी है. उन के निकषों पर उतरे तो ठीक , वरना सरकार नुकसान की भरपाई करेगी. गलत बीजों की आपूर्ती करने वाली कंपनियों  को सरकार की ओर से नोटिस भेजे गये हैं. उन की ओर से भी भरपाई की जायेगी. कपास की फसल लेने वाले किसानों के   नुकसान  की भरपाई हर तरह से की जायेगी, ऐसा विश्वास चंद्रकांत पाटील ने जताया.

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